निजी अस्पतालों की बढ़ेगी लूट,बिना बिल भुगतान नहीं देंगे मृत व्यक्ति का शरीर-Haryana

Haryana: Haryana सरकार विधानसभा में एक ऐसा कानून बनाने जा रही है, जिसमें लोग अपनी मांगें मनवाने के लिए किसी भी मृत व्यक्ति के शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे। इसके पीछे सरकार की सोच है कि व्यक्ति के मरने के बाद जहां उसके शरीर की कई दिनों तक दुर्गति होती है, वहीं मार्ग बाधित रहने से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन होने के साथ ही लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है। राजस्थान में पहले से मृत शरीर सम्मान कानून लागू है।

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Haryana सरकार इसी कानून में यह प्रविधान करने जा रही है कि निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो गई तो इलाज का पूरा बिल चुकता किए बिना परिजनों को शव नहीं मिलेगा। प्रदेश सरकार ने यह प्रविधान राज्य के निजी अस्पताल संचालकों के दबाव में किया है।

Fastnewstoday संबंधित कानून के ड्राफ्ट में आरंभ में जो प्रविधान डाला गया था, उसके मुताबिक निजी अस्पताल संचालक किसी भी मृत व्यक्ति का शव अपने पास नहीं रख सकते, भले ही उसके स्वजनों के पास इलाज के बिल का भुगतान करने के लिए पैसे नहीं हैं।

निजी अस्पताल संचालकों ने इस प्रविधान का कड़ा विरोध किया। राज्य के निजी अस्पताल संचालक स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से मिले। अनिल विज आरंभ में इस हक में बिल्कुल भी नहीं थे कि वे निजी अस्पताल संचालकों की बात को मानें, लेकिन बार-बार की मीटिंग और दबाव के चलते पुराने प्रविधानों को हटा दिया गया।

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नए प्रविधानों में निजी अस्पताल संचालकों की मांग व सोच के अनुरूप यह व्यवस्था कर दी गई कि यदि मृत व्यक्ति के स्वजन बिल का भुगतान नहीं करेंगे तो उन्हें शव नहीं सौंपा जाएगा। इस प्रविधान से प्रदेश की समाजसेवी संस्थाओं और लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि निजी अस्पताल संचालक पहले ही लोगों को लूटने में लगे रहते हैं।

Fastnewstoday अब उन्हें मरीजों का इलाज करने के नाम पर अनाप- शनाप बिल बनाने तथा मरीज की  मृत्यु होने की स्थिति में बिल का भुगतान नहीं करने पर स्वजनों को शव नहीं सौंपने की कानूनन आजादी मिल जाएगी। यह स्थिति गरीब लोगों के लिए बहुत ही कष्टदायी होगी, जिस पर हरियाणा सरकार को विचार करना चाहिए।

Haryana विधानसभा का शुक्रवार से शीतकालीन सत्र आरंभ हो रहा है, जिसमें मृत शरीर सम्मान विधेयक 2023 लाया जाने वाला है। इसके नए संशोधित ड्राफ्ट को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। अब यह अंतिम मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल के पास पहुंच रहा है।

Fastnewstoday कानून में प्रविधान किया जा रहा है कि अगर शव के साथ कोई प्रदर्शन करता है तो प्रदर्शन में शामिल सभी लोगों पर मुकदमा चलाया जाएगा। दोष साबित होने पर एक साल तक की कैद और 50 हजार तक जुर्माने लगाया जा सकता है।

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