संसद में हंगामे पर 14 विपक्षी सांसद शेष सत्र के लिए निलंबित

Haryana: संसद की सुरक्षा में गहरी एवं गंभीर सेंध का साया गुरुवार को दोनों सदनों में विपक्षी दलों के जबरदस्त हंगामे और ड्रामे के रूप में सामने आया। दोनों सदन चले नहीं, 14 विपक्षी सांसदों को सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया और दिनभर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच रस्साकशी चलती रही। न तो स्पीकर व सभापति का आग्रह, फटकार व चेतावनी काम आए और न ही जांच पूरी होने तक इंतजार करने के सरकार के आश्वासन।

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Fastnewstoday सरकार ने विपक्ष से एक गंभीर राष्ट्रीय मामले पर राजनीति नहीं करने के लिए कहा, लेकिन कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल इस बात पर अड़े रहे कि गृह मंत्री अमित शाह संसद आकर इस मामले में बयान दें।

निलंबित होने वाले 13 सदस्य लोकसभा के हैं, जबकि राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सदस्य डेरेक ओ ब्रायन केवल निलंबित ही नहीं हुए, बल्कि उनके आचरण की जांच विशेषाधिकार समिति को भी सौंप दी गई। यह समिति तीन महीने में अपनी रिपोर्ट देगी। डेरेक निलंबन का प्रस्ताव पारित होने के बावजूद सदन में डटे रहे और सभापति जगदीप धनखड़ के कई बार कहने के बावजूद बाहर नहीं गए। लोकसभा से कांग्रेस के नौ सदस्यों के साथ ही माकपा के दो एवं द्रमुक व भाकपा के एक-एक सदस्य को निलंबित किया गया है।

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Fastnewstoday विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कार्यवाही में बाधा डालने और स्पीकर के निर्देशों को नहीं मानने के कारण दो प्रस्तावों के जरिये 13 विपक्षी सदस्यों के निलंबन का प्रस्ताव रखा।

Fastnewstoday पहले प्रस्ताव में टीएन प्रतापन, हिबी इडेन, एस. ज्योतिमणि, राम्या हरिदास और डीन कुरियाकोस  के निलंबन की सिफारिश की गई और दूसरे प्रस्ताव में कांग्रेस से ही वीके श्रीकंदन, बेनी बेहानन, मोहम्मद जावेद और मणिकम टैगोर के साथ ही माकपा के पीआर नटराजन और एस. वेंकटेशन, भाकपा के के. सुब्बारायन, द्रमुक की कनीमोरी के नाम शामिल किए गए।

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सदन में विपक्षी सदस्यों का यह हंगामा उस दिन हुआ जब आपराधिक न्याय कानूनों में आमूलचूल बदलाव करने के लिए प्रस्तावित तीन नए विधेयक चर्चा के लिए प्रस्तावित थे। विपक्षी दलों ने इन विधेयकों का अभी पेश किए जाने का विरोध किया है।

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